Kab Hai Chaitra Navratri 2021 | कब से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्रि | Kab Hai Navratri

Kab Hai Chaitra Navratri 2021 | कब से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्रि | Kab Hai Navratri –

नवरात्रि : यह शब्द सुनते ही हमारे अंतर्मन मे एक नई उमंग एक नई चेतना का एकाएक जैसे जन्म हो जाये। और ऐसा हो भी क्यूँ ना नवरात्रि होते ही इतने पवित्र दिन है। नवरात्रि के प्रत्येक नौ दिन हर्षोल्लास से प्रफुल्लित होते है, प्रत्येक दिन माता रानी के अलग अलग रूपों की पूजा होती है, और कई लोग इन पूरे नव दिन माता रानी के नाम पर उपवास भी रखते है और अंत में रामनवमी के दिन 9 कन्याओं को पूरी सब्जी और हलवा का भोग लगा कर इस नवरात्रि व्रत की समाप्ति करते है।

नवरात्रि मे बच्चों से ले कर बड़े उम्र के भी व्यक्तियों में एक अलग ही उमंग रहती है, सभी लोग अपने अपने घरों मे माता रानी की मूर्ति स्थापित कर इन नव दिन माता के अलग अलग रूपों की पूजा कर उन्हें प्रश्नन करने की अपनी एक असीम कोशिश मे लगे रहते है! माता के सभी भक्त इन नव दिन के व्रत को बहुत ही श्रद्धा भाव पूर्वक रखते है।

नवरात्रि क्या है?

नवरात्रि हिन्दुओ का सर्वोपरी माना जाने वाला एक त्योहार है, जो वैदिक काल से सनातन धर्म (हिन्दुओ मे) द्वारा मनाया जाता आ रहा है। नवरात्रि मे नव दिन माँ दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। नवरात्रि के नवे दिन नौ कन्याओं को पक्का भोजन कराया जाता है और दसवे दिन रावण के पुतले को जला कर, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, इसे दशहरे के रूप मे मनाया जाता है!

दोस्तों अब हम आगे बात करेगे कि नवरात्रि के नव दिन माँ दुर्गा के किन किन रूपों की पूजा अर्चना होती है और नवरात्रि कब कब मनाया जाता है और इनके पीछे निहित पौराणिक कथाओं की भी चर्चा करेगे।

माँ दुर्गा के नव रूप

1) शैलपुत्री :  शैलपुत्री माँ की अराधना से नवरात्रि की पहली सुबह दिन आरम्भ होता है। इस दिन से ही लोग अपने घर मे माँ दुर्गा के प्रत्येक रूप को नव दिन पूजना आरंभ करते है। शैलपुत्री माता के उपवास से महिलाएं, पुरुष यहां तक की बच्चे भी नवरात्रि के व्रत रखना आरंभ करते है। हर घर मे माँ शैलपुत्री कि पूजा अर्चना की जाती है। माँ शैलपुत्री को पहाड़ो की पुत्री भी कहा जाता है। माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना से हमें एक प्रकार की ऊर्जा प्राप्त होती है, इस ऊर्जा का इस्तेमाल हम अपने मन के विकारों को दूर करने में कर सकते हैं। माँ शैलपुत्री को शांत और कृपालु माना जाता है

2) ब्रह्मचारिणी : माता दुर्गा का दूसरा रूप या यूं कह ले कि नवरात्रि का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी का होता है। इस दिन प्रत्येक हिन्दू घर मे माता ब्रह्मचारिणी की अराधना की जाती है। इस स्वरूप की पूजा अर्चना करके हम माँ के अनंत स्वरूप को जानने की कोशिश करते हैं जिससे कि उनकी तरह हम भी इस अनंत संसार में अपनी कुछ पहचान बनाने में कामयाब हो सकें। माता का यह रूप प्रेरणादायक भी माना जाता है।

3) चंद्रघंटा : नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन माता चंद्रघंटा की अराधना होती है। ऐसा माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा का रूप – स्वरूप चन्द्रमा की तरह चमकता है। इनके रूप के आधार पर इन्हें चन्द्रघण्टा नाम की उपाधि दी गयी है। माँ दुर्गा के तीसरे रूप कि अराधना चन्द्रघण्टा माता के रूप मे होती है। ऐसा माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा आराधना से हमारे मन में उत्पन्न द्वेष, ईर्ष्या, घृणा और नकारात्मक शक्तियों से लड़ने का साहस मिलता है और इन सभी चीजों से छुटकारा मिलता है।

4) कूष्माण्डा : नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा माँ के चौथे यानी कूष्माण्डा माता की अर्चना होती है। इस दिन हम माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप की अराधना करते है। माँ कूष्माण्डा की पूजा आराधना करने से हमें अपने आप को उन्नत करने अपने मस्तिष्क की सोचने की शक्ति को शिखर पर ले जाने में में मदद मिलती है।

5) स्कंदमाता : स्कंदमाता की अराधना नवरात्रि के पांचवे दिन होती है। दुर्गा माता के पाँचवे स्वरुप को स्कंदमाता के रूप मे पूजते है।  स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में भी जाना जाता है। स्कंदमाता की पूजा अर्चना करने से हमारे अंदर के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हम व्यावहारिक चीजों से निपटने में सक्षम होते हैं। स्कंदमाता के रूप को तेजस्वी माना जाता है

6) कात्यायनी : कात्यायनी माता के रूप कि अराधना नवरात्रि के छठवे दिन की जाती है। माँ दुर्गा के कात्यायनी  रूप कि अर्चना इस दिन की जाती है। माँ कात्यायनी की पूजा आराधना करने से हमारे अंदर की नकारत्मक शक्तियों का विनाश होता है और माँ के आशीर्वाद से हमें सकारात्मक मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।

7) कालरात्रि : कालरात्रि माँ के रूप को नवरात्रि के सातवें दिन पूजा जाता है। इस दिन हम माँ दुर्गा के कालरात्रि रूप कि अराधना होती है। माँ कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। माँ कालरात्रि की आराधना करने से हमें यश वैभव और वैराग्य की प्राप्ति होती है। माँ कालरात्रि के अत्यंत क्रोधित रूप मे माना जाता है, वह दुष्टों का संहार करने वाली है।

8) महागौरी :  आठवें दिन को माँ महागौरी के दिन के रूप में नवरात्रि मनाया जाता है। इस दिन माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है। माँ महागौरी को सफ़ेद रंग वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है। माँ गौरी के स्वरूप की पूजा आराधना करने पर हमें अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण होने के वरदान प्राप्त होता है। माँ गौरी को स्वरूप को अत्यंत कृपालु माना जाता है। वह अपने भक्तो पर अपनी विशेष कृपा रखती है।

9) सिद्धिदात्री : माँ दुर्गा का नौवां रूप, माँ सिद्धिदात्री के दिन के रूप में मनाया जाता है। माँ सिद्धिदात्री की अर्चना नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन की जाती है।  माँ सिद्धिदात्री की पूजा आराधना करने से हमारे अंदर एक ऐसी क्षमता उत्पन्न होती है जिससे हम अपने सभी कार्यों को आसानी से कर सकें और उनको पूर्ण कर सकें।

नवरात्रि मनाए जाने की कुछ पौराणिक कथाओं का विस्तार

नवरात्रि त्यौहार प्रति वर्ष मुख्य रूप से दो बार बनाया जाता है। हिंदी महीनों के अनुसार पहला Chaitra Navratri चैत्र मास में मनाया जाता है तो दूसरा नवरात्रि अश्विन मास में मनाया जाता है। अंग्रेजी महीनों के अनुसार पहले नवरात्रि मार्च/ अप्रैल एवं दूसरे नवरात्रि सितम्बर/ अक्टूबर में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

नवरात्रि वैदिक युग से ही मनाया जाने वाला विशेष हिन्दुत्व त्यौहार है। इस त्यौहार को शुरू होने के पीछे कुछ प्रचलित कथाएं है  जिसकी वजह से हम तब से लेकर आज तक इस त्यौहार को मनाते चले आ रहे हैं। आमतौर पर यह सभी जानते है और मानते है कि भगवान श्री राम ने अपने अनुज लक्ष्मण एवं अपने सर्वप्रिय भक्त हनुमान एवं पूरी वानर सेना के साथ मिलकर रावण से युद्ध करने से पहले युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए माँ दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी नव दिनों तक पूजा अर्चना की थी।

नव दिन पूजा करने के बाद भगवान श्री राम ने दसवें दिन रावण की सेना पर चढाई कर दी और उस युद्ध में रावण को पराजित कर दिया। तभी से कथा प्रचलित है कि पहले नव दिनों को नवरात्रि के रूप में माँ दुर्गा के नव रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन भगवान राम द्वारा रावण का वध होता है, इसलिए इस दिन को दशहरा के नाम से जानते हैं। दशहरा के दिन रावण का वध होता है इसलिए इस दिन को अब भी भारतवर्ष में रावण के पुतलों को जलाकर, अच्छाई की बुराई पर विजय के रूप में उत्सव मनाया जाता है।

किन्तु नवरात्रि वर्ष मे दो बार मनाया जाता है, इसके पीछे निहित यथार्थ कुछ लोग ही जानते है। नवरात्रि जब अश्विन मास मे मनाया जाता है तो उसके पीछे भगवान राम की पौराणिक कथा निहित है। जिसका वर्णन हम उपरोक्त लेखनी मे कर चुके है, किंतु जब नवरात्रि चैत्र मास मे मनाया जाता है उसके पीछे की कथा कई लोगों को नहीं पता, Chaitra Navratri का चैत्र मास मे मनाए जाने के पीछे एक अन्य कहानी के अनुसार एक महिषासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों मे त्राहि त्राहि मचा रखा था। महिषासुर ने सूर्य , अग्नि , वायु , स्वर्ग के देवता  देव सहित सभी देवताओं पर आक्रमण कर उनके अधिकार छीन लिए।

चूँकि ब्रह्म देव ने पहले महिषासुर को अजेय होने का वरदान दिया था तो इस कारण वश कोई भी देवता उसका सामना नहीं कर सका। महिषासुर ने ब्रह्म देव को अपनी तपस्या से प्रसन्न कर वरदान माँगा कि किसी भी देव, दानव, नर, पशु, किन्नर, के हाथो उसकी मृत्यु ना हो सके। महिषासुर ने वरदान मांगते समय किसी नारी के हाथो उसका वध ना हो सके ऐसा कोई कथन नहीं कहा क्योंकि महिषासुर को अहंकार था कि नारी दुर्बल होती है, वह केवल पुरुष का मन बहलाने का संसाधन है, उस मे इतना साहस कहा कि वह महिषासुर जैसे शक्तिशाली रक्षास का वध कर सके।

इसी अहंकार के चलते उसने नारी को दुर्लभ समझ उसको नजरअंदाज कर दिया और अंत मे यही अहंकार उसकी मृत्यु का कारण बना। महिषासुर का विनाश किसी देवता, पशु, किन्नर के हाथो सम्भव नही। देवताओ ने अपनी बुद्धी का प्रयोग  कर इस समस्या का हल निकाला। सभी देवताओं ने माँ दुर्गा से स्तुति की कि वे महिषासुर राक्षस से युद्ध करें और उसका संहार करके हमें उसके प्रकोप से मुक्त करें। देवताओं की विनती मानते हुए माँ दुर्गा ने महिषासुर से लगातार नौ दिनों तक युद्ध किया और महिषासुर का वध किया।

तभी से माँ दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा अर्चना की जाती है और उसको हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ताकि जैसे माँ ने महिषासुर का वध किया वैसे ही माँ दुर्गा हमारे जीवन की बुराइयों को भी ख़त्म करके हमें अच्छाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा और आशीर्वाद प्रदान करें।
दोस्तो अब हम बात करेंगे इस साल आने वाले चैत्र मास के Chaitra Navratri की। जो अभी कुछ ही दिन मे शुरू होने वाले है, आप सभी जानते ही है कि चैत्र लग चुका है तो नवरात्रि भी जल्द ही शुरू हो रहे है। इस बार Chaitra Navratri 13 अप्रैल से आरम्भ हो रही है और 21 अप्रैल को समाप्त होगी। 

जैसा कि हम बता चुके है कि नवरात्रि के नव दिन दुर्गा माँ के अलग अलग रूपों की पूजा अराधना होती है। नीचे लिखी सूची के अनुसार आपको यह जानने मे आसानी होगी कि नवरात्रि के कौन से दिन कौन सी देवी की पूजा अर्चना की जायगी :-

नवदुर्गा. मंत्र

1. शैलपुत्री –

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्‌।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

2. ब्रह्मचारिणी-

दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला-कमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

3. चंद्रघंटा –

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

4. कूष्माण्डा-

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥

5. स्कंदमाता –

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

6. कात्यायनी –

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानव-घातिनी॥

7. कालरात्रि –

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

8. महागौरी-

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव-प्रमोद-दा॥

9. सिद्धिदात्री-

सिद्धगन्धर्व-यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

मह्त्वपूर्ण बिन्दु :-

 इस चैत्र मास के नवरात्रि 13 अप्रैल 2021 से शुरू है और 21 अप्रैल को समाप्त होंगे

पहला नवरात्रि 13 अप्रैल 2021 को है जिस दिन माता शैलपुत्री की अराधना की जायगी।
दूसरा नवरात्रि 14 अप्रैल 2021 को है, इस दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जायगी।
तीसरा नवरात्रि 15 अप्रैल 2021 को है, इस दिन चंद्रघंटा माता की अराधना की जाएगी।
चौथा नवरात्रि 16 अप्रैल 2021 को है, इस दिन कूष्माण्डा माँ की पूजा की जायगी।
पांचवां नवरात्रि 17 अप्रैल 2021 को है, इस दिन स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।
छठा नवरात्रि 18 अप्रैल 2021 को है, इस दिन माता कात्यायनी की अर्चना की जायगी।
सातवां नवरात्रि 19 अप्रैल 2021 को है, इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा अर्चना की जायगी।
आठवां नवरात्रि 20 अप्रैल 2021 को है, इस दिन महागौरी की अराधना की जाएगी।
नौवां नवरात्रि 21 अप्रैल 2021 को जिसे रामनवमी के रूप मे भी मनाया जाता है, इस दिन माता सिद्धिदात्री की अराधना की जायगी।

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